
घुमारवीं (बिलासपुर)। मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले तलवाड़ा के जांबाज कमलजीत सिंह परिजनों को रोता-बिलखता छोड़ पंचतत्व में विलीन हो गए। रविवार को श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के बेटे रोहित ने मुखागिभन दी। सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से इस रणबांकुरे को अंतिम विदाई दी।
श्रीनगर के पुलवामा में गत शुक्रवार सुबह आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए तलवाड़ा के 40 वर्षीय कमलजीत सिंह का पार्थिव शरीर रविवार सुबह घर पहुंचा। घुमारवीं के एसडीएम राजीव कुमार, डीएसपी अंजनी जसवाल और भाजपा नेता राजेंद्र गर्ग समेत सैकड़ों लोग उससे पहले ही वहां पहुंच गए थे। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को देख परिजन फूट-फूट कर रो पड़े। कमलजीत की पत्नी कांता के विलाप तथा बच्चों रोहित व नेहा के रुदन से हर किसी की आंख नम हो उठी। उन्हें ढांढस बंधाने वाले अपनी रुलाई भी नहीं रोक सके।
पार्थिव देह को कुछ समय तक अंतिम दर्शन के लिए घर के प्रांगण में रखने के बाद शहीद कमलजीत सिंह की अंतिम यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में लोगों ने इस शूरवीर को अंतिम विदाई देने के लिए इसमें भाग लिया। श्मशान घाट पर जब शहीद के बेटे रोहित ने चिता को अग्नि दी तो वहां ‘कमलजीत सिंह अमर रहें’ जैसे नारे गूंज उठे। कमलजीत सिंह की पार्थिव देह के साथ आए कंपनी कमांडर देशराज व अन्य सैनिकों ने अपने साथी को सलामी दी। बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर, सीपीसी राजेश धर्माणी, सदर के विधायक बंबर ठाकुर, पूर्व सैनिक कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष सूबेदार प्रकाश चंद, कैप्टन लश्करी राम और हरनाम सिंह समेत सैकड़ों लोगों ने शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
